पुलिस अधीक्षक की कड़ी सख्ती के बाबजूद भी बड़े  पैमाने पर सक्रिय हैं चिड़िया कबूतर का खेल।

क्रांति जागरण (त्रिलोक चंद)


बुलंदशहर नगर में चिड़िया कबूतर के नाम से चलने वाला जुआ जमकर खेला जा रहा है। जिससे गांव देहात से शहर में मेहनत मजदूरी कर पैसा कमाने आए लोग ज्यादा पैसा बनाने के लालच में इनके झांसे में आकर अपनी मेहनत मजदूरी की रकम को लूटा जाते हैं और घर ले जाते हैं तो बेगारी और लाचारी। नगर के कई मुख्य चौराहे पर यह गोरखधंधा जोरों से चल रहा है। कोई एक-दो जगह अगर छोड़ दी जाए तो ज्यादातर जगह पर पुलिस की पिकेट या चौकी के नजदीक ही यह गोरखधंधा चल रहा है। सोचने वाली बात है कि आखिर किसकी शह पर नगर में इन चिड़िया कबूतर जुआ खिलाने वालों का व्यापार चल रहा है।


*बुलंदशहर में सुबह से शाम जारी रहता है चिड़िया कबूतर के किंग का खेल*


चिड़िया कबूतर का यह खेल स्याना अडडा, अनूपशहर अडडा, धमेड़ा अडडा, जैसे भीड़भाड़ भरे इलाकों में यह बाजार सुबह होते ही सज जाता है। जिससे वहाँ से निकलने वाले लोगों का निकलना मुश्किल और जीना दूभर हो जाता है। चिड़िया कबूतर का खेल शुरू होने के साथ ही लोगों की हार जीत का खेल भी शुरू हो जाता है। हार - जीत के दौरान लोगों में जमकर गाली गलौच के साथ मार पीट तक हो जाती है। बता दें कि अभी जिले में शादियां भी शुरू हो गयी हैं कुछ लोग तो घर से शादी में जाने के लिए निकलते हैं लेकिन शादी के बाद वह चिड़िया कबूतर के सट्टा बाजार में में सट्टा खेलने के लिए चले जाते हैं।


*सुबह होते ही शुरू हो जाता हैं चिड़िया कबूतर का सट्टा बाजार*


जिले में चिड़िया कबूतर सट्टा का बाजार सुबह होते ही चालू हो जाता हैं और जुआ खेलने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो जाती हैं।जिसमें कई लोग ढ़ेर सारे रुपए जीतने के लालच में चिड़िया कबूतर का जुआ खेलने के लिए आते हैं और कुछ लोग ऐसे भी हैं जो लोग चिड़िया कबूतर का जुआ खेलने के दौरान पैसा हार जाते हैं और हारने पर पैसे की लेन देन की बात आती है तो वह आपस में गाली गलौच और मारपीट करने लगते हैं।मामला यही खत्म नहीँ होता हारा हुआ खिलाड़ी या तो मोटे ब्याज पर रकम उधार लेता है या आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाता है जिससे उसका घर बर्वाद हो जाता है और बच्चे भूखे मरने की कगार पर आजाते हैं।


*भनक लगते ही चिड़िया कबूतर के जुआ की ओर भागने लगते लोग*


जुआ खेलने का शौक रखने वाले चिड़िया कबूतर का खेल शुरू होने की भनक लगते ही चिड़िया कबूतर जुआ के खेलने के अड्डों की ओर भागने लगते हैं और घर पर झूठ बोल देते हैं। कि वह किसी काम या फिर किसी फंक्शन में जा रहे हैं लेकिन वह जाते है तो सिर्फ चिड़िया कबूतर का खेल खेलने जहां पर जमकर जुआ खेला जाता हैं। जोकि घर वालों को बिल्कुल भी पता नहीं रहता हैं कि व्यक्ति किस दलदल की ओर बढ़ रहा है।